गौशालाओं के निरीक्षण के दौरान बोले गौ सेवा आयोग के सदस्य, जैविक खेती और गौ आधारित रोजगार को बढ़ावा देने पर दिया जोर
औरैया। गौ सेवा आयोग के सदस्य रमाकान्त उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री की जन सहभागिता योजना के तहत प्रदेश के लोग चार गौवंश अपना सकते हैं। परिवार के दो सदस्य मिलकर आठ गौवंश लेकर नस्ल सुधार का कार्य भी कर सकते हैं। सरकार द्वारा गौवंश के भरण-पोषण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। इससे युवा घर पर रहकर गौसेवा के साथ खेती और अन्य स्वरोजगार कर सकते हैं।
उन्होंने यह बात सौथरा स्थित गौशाला के निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पहले गाय को निराश्रित जीव कहा जाता था, लेकिन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में अब गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। गाय के दूध के साथ-साथ गोबर और गौमूत्र का भी व्यापक उपयोग किया जा सकता है।
गौचर भूमि पर उगाया जाएगा हरा चारा
रमाकान्त उपाध्याय ने सौथरा गौशाला की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए कहा कि गौशाला में पर्याप्त गौचर भूमि उपलब्ध है। इस भूमि पर नेपियर, मोरिंगा सहित विभिन्न प्रकार की हरी घास उगाकर गौवंश के लिए हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि गौशाला का संचालन जै गौ माता ग्रामोद्योग सेवा समिति को दिया गया है, जो गौशालाओं के संचालन के साथ गौ आधारित उत्पाद एवं पंचगव्य उत्पादों के निर्माण की दिशा में भी कार्य कर रही है।
गौ आधारित रोजगार से युवाओं को जोड़ने पर जोर
गौ सेवा आयोग के सदस्य ने कहा कि प्रदेश का युवा रोजगार की तलाश में बाहर जाता है और वहां मेहनत करने के बाद भी सीमित आय बचा पाता है। यदि युवा जन सहभागिता योजना के तहत गौवंश को अपनाकर गौसेवा और खेती से जुड़े, तो वह अपने गांव और परिवार के बीच रहकर बेहतर आजीविका प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि गौवंश के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे भरण-पोषण सहयोग के साथ बायोगैस संयंत्र लगाया जा सकता है। बायोगैस से निकलने वाली स्लरी का उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है। इससे रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च कम होगा और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि जैविक खेती से उत्पादित फसल परिवार के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय का साधन भी बन सकती है। इससे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ रासायनिक उर्वरकों पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिलेगी।
गौशालाओं में अनैतिक दबाव और भ्रामक खबरों पर जताई नाराजगी
रमाकान्त उपाध्याय ने कहा कि कई बार कुछ लोग गौसेवा, गौभक्ति अथवा पत्रकारिता के नाम पर गौशालाओं में पहुंचकर संचालकों पर अनैतिक दबाव बनाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का अनैतिक दबाव या दुष्प्रचार स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि गलत अथवा भ्रामक खबरें प्रसारित करने से प्रशासनिक व्यवस्था पर भी अनावश्यक दबाव पड़ता है। कुछ समय पूर्व औरैया जनपद में गोमती नदी के किनारे मृत गौवंश पड़े होने की एक भ्रामक पोस्ट सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई थी। सूचना मिलने पर प्रशासन मौके पर पहुंचा, लेकिन जांच में मामला भ्रामक पाया गया। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर किसी भी सूचना को प्रसारित करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।
जिलाधिकारी और अधिकारियों से गौशालाओं की स्थिति पर चर्चा
गौ सेवा आयोग के सदस्य ने जिलाधिकारी बृजेश कुमार एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशन सिंह विकल के साथ जनपद की गौशालाओं की स्थिति, समस्याओं एवं उनके समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की।
उन्होंने पूर्व राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट कर गौशालाओं की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर उनके विचार जाने। इसके अलावा जनप्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर शासन की गौ संरक्षण संबंधी नीतियों की जानकारी दी और लोगों को अपने-अपने क्षेत्रों की गौशालाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
इसी क्रम में उन्होंने दिबियापुर नगर पंचायत अध्यक्ष राधव मिश्रा से भी मुलाकात की। इसके अतिरिक्त भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से भी उनकी भेंट हुई। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व कोषाध्यक्ष/उपाध्यक्ष प्रेम गुप्ता, अवधेश शुक्ला, पूर्व महामंत्री शिव सिंह भारती, पूर्व जिला मीडिया प्रभारी/कार्यालय मंत्री बृजेश बंधु, शासकीय अधिवक्ता मुकेश पोरवाल सहित अन्य लोग शामिल रहे।
खानपुर गौशाला का भी किया निरीक्षण
गौ सेवा आयोग के सदस्य ने खानपुर गौशाला का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए गौवंश को समय से भोजन एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद उन्होंने देवकली धाम पहुंचकर महाकाल के दर्शन किए।
इस अवसर पर गौशाला संचालक संतोष गुप्ता, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशन सिंह विकल, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पीसी निरंजन, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बिधूना डॉ. मेहर सिंह, डॉ. अनिरुद्ध सिंह, डॉ. बीबी सिंह, विशाल, पीयूष सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।


