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अधिवक्ता की पत्नी की डिलीवरी के दौरान कथित मनमानी और धमकी का मामला, एफआईआर के आदेश

सोनभद्र। करीब दो वर्ष पूर्व अधिवक्ता की पत्नी की डिलीवरी के दौरान एक निजी अस्पताल में कथित मनमानी, अवैध वसूली और धमकी दिए जाने के मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। सिविल जज जूनियर डिवीजन/एफटीसी/14वां वित्त आयोग, सोनभद्र की अदालत ने रॉबर्ट्सगंज कोतवाल को मामले में सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही सात दिन के भीतर की गई कार्रवाई के संबंध में आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

2024 में अस्पताल में भर्ती हुई थी अधिवक्ता की पत्नी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम हिनौती निवासी अधिवक्ता संतोष पटेल पुत्र इंद्रजीत सिंह ने 29 नवंबर 2024 को सीजेएम न्यायालय, सोनभद्र में धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि उन्होंने 4 अगस्त 2024 की शाम रॉबर्ट्सगंज स्थित एक निजी अस्पताल में अपनी पत्नी विभा शाक्य को प्रसव के लिए भर्ती कराया था।

आरोप के मुताबिक, 5 अगस्त 2024 की शाम करीब पांच बजे चिकित्सक मुक्ता सिंह ने ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराया। अधिवक्ता का कहना है कि उस समय जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ थे और 9 अगस्त 2024 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

डॉक्टरों पर अभद्रता और धमकी के आरोप

प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि डिलीवरी के दौरान कथित रूप से अवैध वसूली के लिए उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। डॉक्टर नेहा सिंह राना पर कथित तौर पर बदतमीजी करने का भी आरोप लगाया गया है।

अधिवक्ता के मुताबिक, जब उन्होंने अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉक्टर आरपी सिंह को पूरे मामले की जानकारी दी तो कथित तौर पर उन्हें डॉक्टरों से विवाद न करने की चेतावनी दी गई और मरीज को नुकसान पहुंचने की बात कही गई।

इसके बाद 4 सितंबर 2024 को अधिवक्ता ने डॉक्टर आरपी सिंह, डॉक्टर मुक्ता सिंह और डॉक्टर नेहा सिंह राना को कानूनी नोटिस भेजा। आरोप है कि नोटिस का जवाब देने के बजाय 12 सितंबर 2024 को डॉक्टर नेहा सिंह राना और उसी रात डॉक्टर अखिलेश पटेल ने मोबाइल फोन पर कथित रूप से गाली-गलौज करते हुए धमकी दी।

पुलिस से कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय पहुंचे

अधिवक्ता का कहना है कि कानूनी नोटिस के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने रॉबर्ट्सगंज थाने में शिकायत की और 4 नवंबर 2024 को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक, सोनभद्र को भी मामले की जानकारी दी। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस स्तर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली।

कोर्ट ने गंभीर प्रकृति का अपराध मानते हुए दिए एफआईआर के आदेश

मामले की पत्रावली 12 दिसंबर 2025 को सीजेएम न्यायालय के आदेश से स्थानांतरित होकर सुनवाई के लिए संबंधित अदालत में पहुंची। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की आख्या का अवलोकन किया, जिसमें एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने की बात सामने आई।

अदालत ने मामले को गंभीर प्रकृति का अपराध मानते हुए पुलिस से विवेचना कराया जाना आवश्यक बताया। इसके बाद रॉबर्ट्सगंज कोतवाल को सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया। न्यायालय ने पुलिस को सात दिन के भीतर की गई कार्रवाई के संबंध में आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं।

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