काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक और बेहद विनाशकारी बाढ़ के पीछे की वजह को लेकर अब बड़ा खुलासा हुआ है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) ने आपदा से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर बाढ़ की संभावित शुरुआत और उसके भयावह रूप लेने की पूरी तस्वीर सामने रखी है।
प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। इसके साथ भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया। इस मलबे ने नदी के प्रवाह को कुछ समय के लिए बाधित किया और इसके बाद पानी तथा मलबे का अचानक तेज बहाव नीचे की ओर दौड़ पड़ा। इसी घटनाक्रम ने देखते ही देखते विनाशकारी फ्लैश फ्लड का रूप ले लिया।
सैटेलाइट तस्वीरों ने कैसे खोला राज?
NRSC ने 24 अगस्त 2026 की Sentinel-2 तस्वीरों की तुलना 26 अगस्त की Resourcesat-2A तस्वीरों से की। इन तस्वीरों में ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर और आसपास के भूभाग में अचानक हुए बड़े बदलाव साफ दिखाई दिए। आपदा के बाद उसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बर्फ-पत्थर के मलबे और भू-भाग में बदलाव दर्ज किया गया।
ISRO के Resourcesat-2A उपग्रह ने 26 अगस्त को करीब 10:30 बजे IST के आसपास आपदा के बाद की तस्वीरें हासिल कीं। इन तस्वीरों में नदी के अत्यधिक फूलने और नीचे की ओर बड़े क्षेत्र में बाढ़ के फैलाव के संकेत भी मिले।
ग्लेशियर टूटने के बाद क्या हुआ?
विशेषज्ञों के अनुसार घटनाक्रम कुछ इस तरह रहा—
ग्लेशियर/हिमखंड का टूटना → बर्फ और चट्टानों का हिमस्खलन → नदी का अस्थायी अवरोध → पानी का जमा होना → अचानक अवरोध टूटना → तेज पानी और मलबे का सैलाब।
इस तरह सामान्य नदी बाढ़ की तुलना में पानी बहुत अधिक तेजी से नीचे आया। पहाड़ी घाटियों की संकरी संरचना ने भी बहाव को और खतरनाक बना दिया। इसके चलते सड़कें, पुल, मकान और दूसरी आधारभूत संरचनाएं बाढ़ और मलबे की चपेट में आ गईं।
क्या भूकंप भी वजह था?
इस मामले में भूकंप को लेकर भी शुरुआती भ्रम सामने आया था। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने क्षेत्र में करीब 4.9 तीव्रता की भूकंपीय घटना दर्ज की थी। शुरुआती आकलनों में यह आशंका जताई गई कि भूकंप ने ग्लेशियर के अस्थिर हिस्से को गिराने में भूमिका निभाई हो सकती है। हालांकि बाद के विश्लेषणों में इस बात पर अधिक जोर दिया गया कि दर्ज किया गया भूकंपीय संकेत स्वयं ग्लेशियर के टूटने और मलबे के तेज बहाव से भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए इस बिंदु पर वैज्ञानिक जांच अभी महत्वपूर्ण है।
अचानक इतनी भयावह क्यों बनी बाढ़?
इस घटना की सबसे बड़ी वजह इसकी फ्लैश फ्लड प्रकृति रही। जब ऊंचाई से भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नदी की ओर आया, तो पानी के सामान्य प्रवाह में अचानक बड़ा बदलाव हुआ। इसके बाद जमा पानी के तेजी से निकलने से नदी का जलस्तर बहुत कम समय में खतरनाक स्तर तक पहुंच गया।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि हिमालय में बढ़ता तापमान और ग्लेशियरों का पीछे हटना ऐसे क्षेत्रों को अधिक अस्थिर बना सकता है। हालांकि इस विशेष घटना में जलवायु परिवर्तन की सीधी भूमिका निर्धारित करने के लिए अभी और वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत है।
तबाही का दायरा कितना बड़ा?
बाढ़ ने नेपाल के रसुवा क्षेत्र और आसपास के नदी तंत्र को बुरी तरह प्रभावित किया। तेज बहाव में घर, सड़कें, पुल और बिजली से जुड़ा बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी इस आपदा का असर पड़ा है और बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है तथा आंकड़े बदल रहे हैं।
ISRO की तस्वीरें क्यों महत्वपूर्ण हैं?
इस आपदा में सैटेलाइट तस्वीरें केवल नुकसान का आकलन करने में ही नहीं, बल्कि बाढ़ की शुरुआत कहां से हुई और पानी किस रास्ते से नीचे आया, इसे समझने में भी महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं।
NRSC का प्रारंभिक विश्लेषण अभी विस्तृत वैज्ञानिक जांच का विषय है, लेकिन सैटेलाइट से मिले ‘पहले और बाद’ के प्रमाणों ने ग्लेशियर क्षेत्र में हुए बड़े बदलाव और उसके बाद नदी में आई असामान्य तेजी के बीच महत्वपूर्ण संबंध की ओर संकेत किया है।
यानी नेपाल में आई यह बाढ़ सिर्फ भारी बारिश से नदी के उफान की सामान्य घटना नहीं दिखती। प्रारंभिक वैज्ञानिक तस्वीर एक ग्लेशियर/आइस-रॉक अवलांच, नदी के अस्थायी अवरोध और उसके बाद अचानक मलबे व पानी के तेज बहाव की ओर इशारा करती है।


