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ग्वालियर में 120 करोड़ के गहनों से सजे राधा-कृष्ण, 62 मोती और 55 पन्नों वाला हार बना आकर्षण

ग्वालियर। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में शुक्रवार को भगवान राधा-कृष्ण का राजसी श्रृंगार किया गया। भगवान को रियासतकालीन सोने, चांदी और बेशकीमती रत्नों से बने आभूषण पहनाए गए। इन आभूषणों की मौजूदा कीमत करीब 120 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। विशेष श्रृंगार के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

62 असली मोती और 55 पन्नों वाला हार

गोपाल मंदिर के आभूषणों में सबसे खास सात लड़ियों वाला हार है। इसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हुए हैं। इसकी अनुमानित कीमत करीब 35 करोड़ रुपये बताई जाती है। इसके अलावा करीब 25 करोड़ रुपये कीमत का रत्नजड़ित मुकुट और लगभग 1.25 करोड़ रुपये का सोने का मुकुट भी भगवान के श्रृंगार का हिस्सा है।

राधारानी के श्रृंगार में भी रत्नजड़ित मुकुट, हार, कंगन, नथ और अन्य पारंपरिक आभूषण शामिल किए गए। इन गहनों में पुखराज, माणिक, पन्ना, हीरे और मोती जैसे कीमती रत्न जड़े हैं।

बैंक लॉकर से कड़ी सुरक्षा में निकाले गए गहने

इतने बेशकीमती आभूषणों को सामान्य दिनों में बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है। जन्माष्टमी पर विशेष व्यवस्था के तहत इन्हें सुरक्षा घेरे में मंदिर लाया गया और साफ-सफाई के बाद भगवान का श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर में भीड़ को देखते हुए पुलिस बल, सीसीटीवी और एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था की गई।

सिंधिया राजघराने से जुड़ी है विरासत

गोपाल मंदिर और यहां के आभूषण ग्वालियर की रियासतकालीन विरासत से जुड़े हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मंदिर का निर्माण 1843 में महारानी बैजाबाई ने कराया था। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर में मराठा और यूरोपीय स्थापत्य की झलक दिखाई देती है।

जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण का यह राजसी श्रृंगार धार्मिक आस्था के साथ ग्वालियर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की भी झलक पेश करता है।

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