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सनातन परंपरा भारत की शक्ति और एकता का आधार, रायबरेली में बोले सीएम योगी

रायबरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं देश की एकता और शक्ति का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि जब तक देश में पवित्र धार्मिक कथाओं और सनातन परंपराओं की धारा निरंतर प्रवाहित होती रहेगी, तब तक भारत की सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास मजबूत बना रहेगा।

मुख्यमंत्री रविवार को रायबरेली के ऊंचाहार क्षेत्र में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा में शामिल होने पहुंचे। कार्यक्रम का आयोजन खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय की ओर से किया गया था। कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा का वाचन किया। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

शिव भक्ति को बताया लोकमंगल का मार्ग

सीएम योगी ने कहा कि भगवान शिव की आराधना केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोककल्याण और समाज को सकारात्मक दिशा देने की प्रेरणा भी देती है। उन्होंने कहा कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में खान-पान, पहनावे और रहन-सहन में भिन्नता होने के बावजूद भगवान शिव के प्रति आस्था लोगों को एक सूत्र में जोड़ती है।

उन्होंने हिमालय से लेकर रामेश्वरम तक स्थित ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये धार्मिक स्थल भारत की सांस्कृतिक एकता और अखंडता का प्रतीक हैं। शिव भक्ति ने देश के विभिन्न हिस्सों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

तुलसीदास और रामकथा का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में गोस्वामी तुलसीदास और रामकथा की परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कठिन ऐतिहासिक दौर में धार्मिक कथाओं और व्यासपीठों ने समाज में चेतना और सांस्कृतिक एकजुटता बनाए रखने का काम किया।

उन्होंने कहा कि रामकथा और रामलीला जैसी परंपराओं ने लोगों को अपनी संस्कृति और मूल्यों से जोड़े रखा। धार्मिक कथाओं की यह परंपरा समाज को प्रेरणा देने के साथ राष्ट्र की चेतना को भी मजबूत करती रही है।

उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत का जिक्र

सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश की धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत को भी रेखांकित किया। उन्होंने अयोध्या को मर्यादा, काशी को चेतना, मथुरा-वृंदावन को भक्ति और प्रयागराज को समरसता से जोड़ते हुए प्रदेश की धार्मिक परंपराओं का उल्लेख किया। नैमिषारण्य और शुकतीर्थ जैसी जगहों को उन्होंने ज्ञान और पुराण परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की पहचान नहीं है, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को भी दिशा देने वाली परंपरा है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक चेतना और लोककल्याण की भावना को आगे बढ़ाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा का अभिनंदन किया और व्यासपीठ को नमन किया। कथा स्थल पर वेदपाठी बटुकों ने शंखनाद और डमरू की मंगल ध्वनि के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

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