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राम मंदिर में तीन महीने में बदल गया पूरा सिस्टम! दान चोरी के आरोप से CEO की नियुक्ति तक, जानिए कैसे बदला अयोध्या का नजारा

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े प्रबंधन में पिछले करीब तीन महीनों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जून में मंदिर के चढ़ावे की रकम में कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों से शुरू हुआ राजनीतिक विवाद जांच तक पहुंचा। इसके बाद गिरफ्तारियां हुईं, ट्रस्ट के पदाधिकारियों के इस्तीफे हुए और अब मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति कर दी है।

जून में चढ़ावे की रकम को लेकर उठा विवाद

मामला जून की शुरुआत में उस समय चर्चा में आया, जब मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान कथित गड़बड़ी और नकदी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी सामने आई। इसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।

7 जून को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर सवाल उठाए और कथित चोरी को लेकर गंभीर आरोप लगाए। इसके जवाब में तत्कालीन ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने दान प्रबंधन की आंतरिक जांच और ऑडिट का हवाला देते हुए आरोपों को खारिज किया था। विवाद बढ़ने के साथ मामला जांच के दायरे में आ गया।

SIT जांच के बाद हुई गिरफ्तारियां

विवाद बढ़ने के बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT गठित की। जांच टीम ने चढ़ावे की गणना प्रक्रिया, CCTV फुटेज, कर्मचारियों की भूमिका, रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की।

SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद 25 जून को रामजन्मभूमि थाने में FIR दर्ज की गई। मामले में आठ लोगों को नामजद किया गया और पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद मंदिर में चढ़ावे की रकम की गणना और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे।

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे

विवाद और जांच के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए। 6 जुलाई की ट्रस्ट बैठक में यह बदलाव हुआ। इसके साथ ही मंदिर के प्रशासनिक संचालन को अधिक व्यवस्थित करने के लिए CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

बाद में सामने आई SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा के नाम नहीं होने की रिपोर्ट भी सामने आई। यानी जिन पर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर सवाल उठे थे, उनकी भूमिका को लेकर जांच का निष्कर्ष अलग रहा।

अब पहली बार राम मंदिर ट्रस्ट में CEO

लगातार बढ़ती प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को अपना पहला CEO नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना में लंबे समय तक सेवा देने वाले मिश्र को बड़े स्तर पर नेतृत्व और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व भी किया था।

CEO की नियुक्ति को मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब ट्रस्ट के धार्मिक दायित्वों के साथ-साथ प्रशासनिक, संचालन और निगरानी व्यवस्था को अधिक पेशेवर ढंग से संचालित करने की कोशिश दिखाई दे रही है।

तीन महीने में क्या-क्या बदला?

जून में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने से शुरू हुआ घटनाक्रम अब प्रशासनिक पुनर्गठन तक पहुंच गया है।

आरोप → जवाब → SIT जांच → FIR और गिरफ्तारियां → ट्रस्ट में बदलाव → CEO की नियुक्ति

इन घटनाओं ने अयोध्या के राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को एक नए चरण में पहुंचा दिया है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि नई व्यवस्था में पारदर्शिता, सुरक्षा, दान प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही को किस तरह मजबूत किया जाता है।

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