नई दिल्ली। स्कूलों में हिजाब पहनने के मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले को लेकर AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने अदालत के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में यह तय करना अदालत का काम नहीं है कि किसी धर्म के लिए क्या जरूरी है और क्या नहीं।
दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल में हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति दिए जाने की मांग को लेकर एक मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज कर दी थी। इसी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय बताया।
ओवैसी ने कहा कि किसी व्यक्ति के धर्म में क्या आवश्यक है, इसका निर्णय संबंधित समुदाय और उसके अनुयायी करते हैं। उन्होंने अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायाधीश यह तय नहीं कर सकते कि इस्लाम में क्या जरूरी है और क्या नहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसले का असर मुस्लिम छात्राओं की शिक्षा पर पड़ सकता है। ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम लड़कियों को शिक्षा से दूर करने के बजाय उनके धार्मिक विश्वासों का सम्मान किया जाना चाहिए।
फैसले को लेकर राजनीतिक बहस तेज
हिजाब से जुड़े इस फैसले के बाद धार्मिक स्वतंत्रता, स्कूलों की ड्रेस कोड नीति और शिक्षा के अधिकार को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। एक ओर अदालत के फैसले को स्कूलों में निर्धारित ड्रेस कोड से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ओवैसी समेत कुछ नेताओं ने इसे धार्मिक अधिकारों के नजरिए से उठाया है।
मामले को लेकर आगे राजनीतिक और कानूनी बहस जारी रहने की संभावना है।


